पूर्वांचल और सेंट्रल यूपी के क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं : अरविंद सिंह
लखनऊ। क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश एवं क्रिकेट एसोसिएशन पूर्वांचल के पदाधिकारियों की बैठक मल्टी एक्टिविटी सेंटर, कपूरथला में आयोजित हुई।
बैठक में क्रिकेट प्लेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने कहा कि “पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) द्वारा आयोजित यूपी टी-20 में भारत की अंडर-19 टीम के लिए खेल रहे किशन कुमार सिंह, अमन चौहान, आदित्य सिंह एवं काव्या तेवतिया जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अंडर-23 के खिलाड़ियों को भी फ्रेंचाइजी की अंतिम-11 में अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश के क्रिकेट खिलाड़ियों की प्रतिभा के साथ घोर अन्याय बताया।
अरविंद सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आबादी लगभग 30 करोड़ है। ऐसे में यूपी टी-20 में केवल 6 टीमों का होना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कम से कम 12 टीमें होनी चाहिए और टीमों के मालिकों में पूर्वांचल एवं मध्य उत्तर प्रदेश का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए, ताकि इन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली क्रिकेट खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने का उचित अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि यूपी टी-20 में खेलने वाले लगभग 95 प्रतिशत क्रिकेट खिलाड़ी पश्चिमी उत्तर प्रदेश या दिल्ली से हैं, जो प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के खिलाड़ियों के साथ न्याय नहीं है।
एसोसिएशन के सचिव शिवबचन ने उत्तर प्रदेश के नई पीढ़ी के क्रिकेट खिलाड़ियों से अपील की कि वे सितंबर में होने वाले आंदोलन में बड़ी संख्या में भाग लें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अनुराग सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी को देखते हुए प्रदेश में 3 क्रिकेट टीमों की मांग को लेकर बड़ा जन आंदोलन किया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के नई पीढ़ी के क्रिकेट खिलाड़ियों से सड़क पर उतरकर इस आंदोलन में भाग लेने की अपील की, ताकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) पर दबाव बने तथा उत्तर प्रदेश में 3 क्रिकेट एसोसिएशनों को मान्यता मिल सके।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के हर क्षेत्र के क्रिकेट खिलाड़ियों को समान अवसर दिलाना और उन्हें उनका वाजिब हक दिलाना है।

