परमात्मा अपने से दूर होते हुए भी सबसे बडे हितैषी-पं.सुनिधि मिश्रा
बहराइच। संसार अपना दिखता हुआ प्रतीत होते हुए भी अपना नहीं है और परमात्मा अपने से दूर प्रतीत होते हुए भी अपने सबसे निकट एवं सबसे बड़े हितैषी हैं। संसार का मायावी व्यवहार जितना शीघ्र समझ आ जायेगा, उतनी शीघ्र आपकी बुद्धि परमात्मा की ओर लगने लगेगी। केवल सांसारिक बुद्धि से जीव का कल्याण कभी संभव नहीं हो सकता इसलिए संसार की परीक्षा भी करते रहना चाहिए। जितनी जल्दी संसार के सत्य को जान लोगे इससे मुक्त हो जाओगे क्योंकि जानना ही मुक्त होने का मार्ग भी है।
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संसार की परीक्षा करते-करते समय-समय पर स्वयं का भी निरीक्षण करते रहें कि कहीं मैं अपने मार्ग से भटक तो नहीं रहा। भौतिक एवं आध्यात्मिक समृद्धि आपको स्वयं के द्वारा ही प्राप्त होगी। अज्ञानी व्यक्ति स्वयं के बजाय दूसरों के गुण-दोषों का चिंतन करते रहने के कारण अपने जीवन में कुछ श्रेष्ठ पाने से भी वंचित रह जाता है। संसार का त्याग नहीं अपितु संसार मेरा है।
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इस भावना का त्याग आपको प्रभु चरणों का प्रेमी बना देगा।इस अवसर पर घनश्याम सिंह ,अश्विनी सिंह, पुष्पेन्द् सिंह, राम बहाल सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, नीरज कांत पाठक, शरद कांत पाठक, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, गिरधारीलाल विश्वकर्मा,शिव सहाय सिंह समेत मौजूद रहे।
