घर-घर खिलाई जाएगी फाइलेरिया से बचाव की दवा,2.88 लाख से अधिक लोगों को मिलेगी बीमारी से सुरक्षा
बहराइच। जनपद बहराइच फाइलेरिया उन्मूलन की ओर अग्रसर है, यही कारण है इस वर्ष राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत केवल जरवल ब्लॉक में ही सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान संचालित किया जा रहा है। यह अभियान 10 फरवरी से 28 फरवरी तक चलेगा।
अभियान के सफल संचालन के लिए 43 सुपरवाइजर एवं 510 स्वास्थ्य टीमें गठित की गई हैं, जो घर-घर जाकर अपने सामने 2.88 लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएंगी।
यह जानकारी जरवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सभागार में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में जिला फाइलेरिया नियंत्रण अधिकारी (एफसीओ) दीपमाला ने दी। उन्होंने बताया कि बीते पाँच वर्षों से लगातार चल रहे एमडीए अभियानों के परिणामस्वरूप इस बार जरवल ब्लॉक में सूक्ष्म कृमियों की दर अधिक पाई गई, इसी कारण यहां विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शेष ब्लॉकों में जल्द ही फाइलेरिया प्रसार दर की जांच के लिए संचरण मूल्यांकन सर्वेक्षण (टास) कराया जायेगा। जिसके आधार पर आगे उन्मूलन की रणनीति बनाई जाएगी।
एफसीओ ने बताया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ पंचायती राज, शिक्षा, बाल विकास, सूचना एवं अन्य विभागों का भी सहयोग लिया गया है। अभियान की शुरुआत ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों द्वारा स्वयं दवा सेवन कर की जाएगी, जिससे आमजन में विश्वास बढ़े।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दवा खाली पेट नहीं लेनी है। दो वर्ष से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं एवं गंभीर बीमार व्यक्ति को छोड़कर शेष सभी लोगों को दवा सेवन कराया जायेगा।
एफसीओ ने मीडिया से अपील की कि अभियान की सही व स्पष्ट जानकारी जन-जन तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि इस लाइलाज बीमारी से समाज को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार फाइलेरिया उन्मूलन के लिए सर्वजन दवा सेवन, रोग प्रबंधन, वाहक नियंत्रण, विभागीय समन्वय एवं डिजिटल नवाचार पर आधारित पांच-स्तंभीय रणनीति पर कार्य कर रही है।
इस अवसर पर सीएचसी अधीक्षक (इंचार्ज) डा. रवी शंकर शुक्ला ने कहा कि फाइलेरिया से बचाव की दवाएं डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रमाणित, सुरक्षित और प्रभावी हैं। दवा सेवन के बाद हल्का बुखार या चक्कर आना सामान्य प्रक्रिया है, जो शरीर में मौजूद सूक्ष्म कृमियों के नष्ट होने का शुभ संकेत है। उन्होंने कहा, “असली खतरा दवा न लेना है, क्योंकि एक संक्रमित व्यक्ति पूरे गांव को जोखिम में डाल सकता है।”
उन्होंने लोगों से अपील की कि दवाएं स्वास्थ्य कर्मियों के सामने ही सेवन करें, ताकि सही खुराक एक साथ सभी को मिल सके। किसी भी स्थिति में दवाएं घर ले जाने या बाद में खाने के लिए नहीं दी जाएंगी।
फाइलेरिया इंस्पेक्टर रत्नेश कुमार रत्नाकर ने बताया कि फाइलेरिया मच्छरों से फैलने वाली एक गंभीर एवं लाइलाज बीमारी है, जिसके लक्षण कई वर्षों बाद हाथीपांव एवं हाइड्रोसील के रूप में सामने आते हैं। हाइड्रोसील का ऑपरेशन संभव है, लेकिन हाथीपांव का कोई इलाज नहीं है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका एमडीए अभियान के तहत फाइलेरिया से बचाव की दवा सेवन है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जरवल ब्लॉक में फाइलेरिया (हाथीपांव) के 50 तथा हाइड्रोसील के 23 मरीज पंजीकृत हैं।
कार्यशाला में मेडिकल ऑफिसर डा. विनोद कुमार, डा. अशोक सिंह, फाइलेरिया इंस्पेक्टर विमल कुमार, बीसीपीएम सोनी जायसवाल, पाथ संस्था से अभिषेक जायसवाल, पीसीआई से अवनीश मिश्रा, सीफार प्रतिनिधि सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं मीडिया साथी उपस्थित रहे।
