फसल अवशेष व पाराली को खेतों में न जलायें किसान: उप कृषि निदेशक
बहराइच । उप कृषि निदेशक विनय कुमार वर्मा ने जिले के किसानों से अपील की है कि पराली/फसल अवशेष को खेत में न जलायें। पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है तथा इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने पर सरकार द्वारा भी पराली जलाना प्रतिबन्धित किया गया है। पराली जलाये जाने पर 02 एकड़ तक रू. 5000=00, 2 से 5 एकड़ तक रू. 10000=00 तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में पराली जलाने पर रू. 30000=00 का अर्थदण्ड लगाये जाने के साथ पराली जलाये जाने पर कृषक को सरकारी योजनाओं के लाभ वंचित किया जा सकता है तथा गन्ना कृषक का सट्टा भी लॉक कर दिया जायेगा।
उप कृषि निदेशक श्री वर्मा ने बताया कि फसल अवशेष जलाये जाने से कार्बन मोनोआक्साइड, सल्फर डाइआक्साइड आदि जहरीली गैसें तथा सूक्ष्मकणिका तत्व उत्पन्न होने से श्वास एवं त्वचा सम्बन्धी बीमारियां पैदा होती है जो मानव जीवन एवं पर्यावरण हेतु अत्यन्त ही हानिकारक होने के साथ साथ मृदा में पाये जाने वाले लाभदायक सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट कर देते हैं, जिससे फसल की उत्पादकता कम हो जाती है।
उन्होंने किसानों को सुझाव दिया है कि फसल अवशेष को खेत में सड़ाकर कम्पोस्ट खाद बनाकर अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा पराली को अपने नजदीकी गौशालाओं में दान कर पुण्य कार्य में भागीदार बन सकते हैं। श्री वर्मा ने बताया कि जनपद में अब तक जिलाधिकारी द्वारा पराली जलाने वाले 56 किसानों पर रू. 01 लाख 82 हज़ार 500 का अर्थ दण्ड लगाया गया है।
