पराली जलाने वाले 49 व्यक्तियों पर डीएम ने लगाया रू. 1.70 लाख का अर्थदण्ड

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बहराइच । जनपद में पराली व फसल अवशेषों को खेतों में जलाने की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश तथा पराली सहित सभी प्रकार के फसल अवशेषों के बेहतर प्रबन्धन हेतु आमजन व कृषकों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रमोशन आफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन इन सीटू मैनेजमेन्ट आफ क्राप रेजीड्यू योजनान्तर्गत जनपद की समस्त तहसीलों में व्यापक प्रचार-प्रसार के दृष्टिगत पिछले 05 दिनों से तीन-तीन पराली प्रचार वैन को कृषि भवन बहराइच के प्रांगण सुदूर ग्रामीण अंचलों में भेजा जा रहा है। जागरूकता वाहन गांव-गांव जाकर कृषकों में पराली प्रबन्धन, बायोडीकम्पोजर का उपयोग कर कम्पोस्ट बनाना तथा अधिक पराली होने पर उसका विपुल इंडस्ट्री आसाम चौराहा रिसिया को विक्रय अथवा बेलर से बंडल बनाकर अन्य उपयोग में लाने के तरीके बता रहे हैं।

यह जानकारी देते हुए उप निदेशक कृषि विनय कुमार वर्मा ने विभागीय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देष दिया है कि गांव-गांव जाकर किसानों को खेतों में फसल अवशेष न जलाने के लिए जागरूक करें। साथ हीयह भी बताया जाय कि पराली व फसल अवशेषों के बेहतर प्रबन्धन से भूमि की उर्वरा शक्ति में इज़ाफा किया जा सकता है। इनसीटू यंत्रों के उपयोग से खेतों में मिलाकर कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है अथवा अवशेष पराली को आस-पास की गौशाला को दान किया जा सकता तथा बेलर मशीनों की मदद से पराली का गट्ठर तैयार कर विपुल इन्डस्ट्री को बेच कर अतिरिक्त आय भी अर्जित की जा सकती है। पराली जलाना स्वास्थ्य व पर्यावरण के लिए हानिकारक है। किसानों को बायो-डी कम्पोज़र की मदद से खाद बनाने के तरीको को बताया जाय।

श्री वर्मा द्वारा विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों को यह भी निर्देष दिया गया है कि किसानों को बताया जाय कि पराली/फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति तथा लाभदायक जीवाणु नष्ट हो जाते है तथा आस-पास आग लगने की संभावना बनी रहती है, जिससे जन एवं धन की अपार क्षति होती है। जागरूकता वाहन के माध्यम से किसानों को बताया जा रहा है कि पराली जलाना दण्डनीय अपराध है। इसके लिए कृषकों से रक्बा के अनुसार 02 एकड़ तक रू. 2500/-, 02 एकड़ से 05 एकड़ तक रू. 5000/- तथा 05 एकड़ से अधिक के लिए रू. 15000 अर्थदण्ड की वसूली भी की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि जिलाधिकारी जिले के सम्बन्धित अधिकारियों, राजस्व लेखपालों एवं कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों को पराली जलाने से रोकने हेतु कड़े निर्देश दिए गए हैं।

उप निदेशक कृषि श्री वर्मा ने किसानों से अपील की कि पराली/फसल अवशेषों को जलाये नहीं वरन उसे इन सीटू यन्त्रों (मल्चर/रोटावेटर/रिवर्सेबल एम.वी. प्लाऊ) आदि से जुताई कर खेतों में मिलाकर कम्पोस्ट बना लें, इससे भूमि की उर्वरा शक्ति में वृद्धि होगी तथा फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा। किसानों को सुझाव दिया गया है कि खेती के साथ-साथ फसल अवशेष व पराली प्रबन्धन में वैज्ञानिक विधि व अत्याधुनिक कृषि यन्त्रों का प्रयोग कर अपनी आय में इज़ाफे के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में सहयोग कर पृथ्वी के वातावरण को जीवन योग्य बनाये रखने में मदद करें।

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