अप्राकृतिक दुष्कर्म के दोषी को 20 साल का कठोर कारावास
बहराइच। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के चलते पॉक्सो एक्ट के एक मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायालय पॉक्सो के पीठासीन अधिकारी अरविन्द कुमार गौतम ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया।
पुलिस के अनुसार, रानीपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में 29 अप्रैल 2024 की रात करीब आठ बजे गरीबे पुत्र सत्तन निवासी सपहा, थाना रानीपुर ने 10 वर्षीय बालक को खेत में ले जाकर उसके साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किया था। पीड़ित के परिजनों की तहरीर पर 30 अप्रैल 2024 को थाना रानीपुर में मुकदमा अपराध संख्या 91/2024 के तहत धारा 377 भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(एम)/6 में मुकदमा दर्ज किया गया था।
विवेचक उपनिरीक्षक वीर पाल सिंह ने साक्ष्य संकलन और गवाहों के बयान के आधार पर 25 मई 2024 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावी पैरवी के बाद न्यायालय ने 23 अक्टूबर 2026 को अभियुक्त गरीबे को दोषसिद्ध करार देते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
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वहीं, भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत 10 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देशन में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इस मामले में मॉनिटरिंग सेल, थाना रानीपुर पुलिस, जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह, कोर्ट मोहर्रिर ब्रजेश साहनी और थाना पैरोकार रामसिंह यादव की प्रभावी पैरवी रही।
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